महान रॉक बैंड U2 के अँग्रेज़ी गीत, 'Ordinary Love' के अनुवाद का प्रयास कर रहा हूँ । आप वह गीत अंग्रेज़ी में यहाँ पढ़ सकते हैं: http://www.u2.com/discography/lyrics/lyric/song/585/
समुद्र की चाह चूमे स्वर्णिम किनारा।
सूर्य की किरणें गरमाए तुम्हारे अंग।
जो खो गया था पहले सौंदर्य सारा, वो फिर पाना चाहे हम को संग।
मैं और नहीं लड़ सकता तुमसे, मैं लड़ ही तो रहा तुम्हारे लिए।
समुद्र ने फेंके कठोर पत्थर पर समय, उन्हें चिकने कर गया हमारे लिए।
हम और क्या गिरेंगे यहाँ से जो, न अनुभव कर सकें सहज प्रेम का।
और नहीं कोई आरोहण संभव, जो हम सामना न कर सकें सहज प्रेम का।
पंछी ऊंचा उड़ते है गर्म आसमान में और करते थोड़ा आराम नर्म हवाओं पर।
वही हवाएँ संभाल लेंगी तुम्हे और मुझे, चलो हम भी बनायें आशियाँ पेड़ों पर।
तुम्हारा दिल मेरी आस्तीन पर है, क्या जादूई कलम से था वहां बना दिया।
वर्षों तक मैं मानता रहा, की यह संसार, जितना मिटाये पर वह न मिटा किया।
क्योंकि हम और क्या गिरेंगे यहाँ से जो, न अनुभव कर सकें सहज प्रेम का।
और नहीं कोई आरोहण संभव, जो हम सामना न कर सकें सहज प्रेम का।
क्या सबल हम इतने, पूर्वाकाँक्षा जो सहज प्रेम की ?
हम और क्या गिरेंगे यहाँ से जो, न अनुभव कर सकें सहज प्रेम का।
और नहीं कोई आरोहण संभव, जो हम सामना न कर सकें सहज प्रेम का।
क्या सबल हम इतने, पूर्वाकाँक्षा जो सहज प्रेम की ?
क्या सबल हम इतने, पूर्वाकाँक्षा जो सहज प्रेम की ?
क्या सबल हम इतने, पूर्वाकाँक्षा जो सहज प्रेम की ?
समुद्र की चाह चूमे स्वर्णिम किनारा।
सूर्य की किरणें गरमाए तुम्हारे अंग।
जो खो गया था पहले सौंदर्य सारा, वो फिर पाना चाहे हम को संग।
मैं और नहीं लड़ सकता तुमसे, मैं लड़ ही तो रहा तुम्हारे लिए।
समुद्र ने फेंके कठोर पत्थर पर समय, उन्हें चिकने कर गया हमारे लिए।
हम और क्या गिरेंगे यहाँ से जो, न अनुभव कर सकें सहज प्रेम का।
और नहीं कोई आरोहण संभव, जो हम सामना न कर सकें सहज प्रेम का।
पंछी ऊंचा उड़ते है गर्म आसमान में और करते थोड़ा आराम नर्म हवाओं पर।
वही हवाएँ संभाल लेंगी तुम्हे और मुझे, चलो हम भी बनायें आशियाँ पेड़ों पर।
तुम्हारा दिल मेरी आस्तीन पर है, क्या जादूई कलम से था वहां बना दिया।
वर्षों तक मैं मानता रहा, की यह संसार, जितना मिटाये पर वह न मिटा किया।
क्योंकि हम और क्या गिरेंगे यहाँ से जो, न अनुभव कर सकें सहज प्रेम का।
और नहीं कोई आरोहण संभव, जो हम सामना न कर सकें सहज प्रेम का।
क्या सबल हम इतने, पूर्वाकाँक्षा जो सहज प्रेम की ?
हम और क्या गिरेंगे यहाँ से जो, न अनुभव कर सकें सहज प्रेम का।
और नहीं कोई आरोहण संभव, जो हम सामना न कर सकें सहज प्रेम का।
क्या सबल हम इतने, पूर्वाकाँक्षा जो सहज प्रेम की ?
क्या सबल हम इतने, पूर्वाकाँक्षा जो सहज प्रेम की ?
क्या सबल हम इतने, पूर्वाकाँक्षा जो सहज प्रेम की ?