September 08, 2009
चंद शेर
आज किताबों में सहेज के रखते हैं सूखे हुए फूल
जो कभी बागीचों मे कलियाँ रोंधकर गुज़र जाते थे
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जब हाथ काँपने लगे जाम उठाते तो रुक जाता हूँ
मयखाने के बाहर हमप्याला बेईमान हो जाते हैं
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पहाडों में गुज़रे कुछ दिन तो वंही रह जाने को मन किया
मैदानों में पता ही नहीं चलता सूरज कंहा डूब जाता है
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मौसम की बाजीगरी ये की मिजाज़, माहौल सब बदल दे
हम अपनी तसल्ली को घरोंदों में बसेरा कर लेते हैं
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June 03, 2009
सफर बस उतना ही कटता रहा ऐ दिल
यादों की बगिया सींचता रहा ऐ दिल
मौसम फिर से बेरंग जाता रहा ऐ दिल
क़दमों को बढाकर गिनता रहा ऐ दिल
सफर बस उतना ही कटता रहा ऐ दिल
साहिब मकान ऊँचा करता रहा ऐ दिल
पंछी पेड़ पर घोसला बुनता रहा ऐ दिल
हर मौसम नया वादा करता रहा ऐ दिल
क्या करे जो मौसम बदलता रहा ऐ दिल
दिन वो भी थे हौसला साथ रहा ऐ दिल
अब टूट गए, वक्त रोंद्ता रहा ऐ दिल
वो डरा हुआ लड़का चलता रहा ऐ दिल
मैं जेब मे बटुआ ढूँढता रहा ऐ दिल
May 22, 2009
आँगन में लगा आम का पेड़ हरा है
मकान की दीवारें बेरंग हैं तो क्या
आँगन में लगा आम का पेड़ हरा है
एक चम्मच शक्कर गिरी मेज़ पर
उस तरफ़ चीटियों का कारवां चला है
मुमकिन ये भी है की वो बेवफा न हो
यही सोच आशिक दुनिया से चला है
पतझड़ मे फूल मुरझा गए तो क्या
ये चमन अब भी उम्मीदों से भरा है
सरकारें बाट रही हैं मुफ्त मे रोटियां
मजदूरों के औजारों में क्या धरा है
अकेला था तो चाहा कोई हाथ थाम ले
अब मेले में नयन-नक्श जांच रहा है
May 18, 2009
ये ज़िन्दगी है, ख्वाब नही
ये ज़िन्दगी है, ख्वाब नही,
सुबह इसे कुछ और जीना पड़ेगा
मील के पत्थर अभी चुप हैं
राही को कुछ और भटकना पड़ेगा
मैं उनकी जुल्फों के गिरफ्त में हूँ
इनसे निकलूँ तो फिर सवेरा पड़ेगा
सफर ख़त्म हुआ तो मन उदास है
फिर किसी नई डगर चलना पड़ेगा
March 22, 2009
परछाइयों के अंधेरे मे खो जाओगे
भीड़ भरे रास्तों पर सर उठा के चलो
आईने मे चाँद मिल भी जाए तो क्या
कभी बाहर चांदनी की छाओं में चलो
वो खड़ा है उस तरफ़ अकेला, गुमसुम
थोड़ा मुस्कुराओ और उसकी ओर चलो
ये बारिश नही रुकेगी आज की शाम
मौसम में एक बार तो भीगते चलो
आज की शाम न दोस्त हैं, न साथी
आज मयखाने अकेले ही चलो
March 02, 2009
ज़िन्दगी गुज़र जाती है, हम देखते रह जाते हैं
ज़िन्दगी गुज़र जाती है, हम देखते रह जाते हैं
जिन लम्हों को ढूंढता हूँ मैं, जाने कहाँ हैं
उन्हें ढूँढने मे कई और दिन निकल जाते हैं
बचपन मे सुनी कहानियो को भूलना ही ठीक
जवानी मे परियों को ढूँढ दीवाने हुए जाते हैं
कुछ ज्यादा ही खुश मिजाज़ है आज मेरा यार
उनकी खुशी मे हम भी खुश हुए जाते हैं