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November 30, 2022

हवस के चश्मे से नित बदलता रंग दिखता है

हवस के चश्मे से नित बदलता रंग दिखता है 

जो रंगीन दिखता था वो अब बेरंग दिखता है


तस्वीर नहीं बताती सूरज उग रहा या ढल रहा 

बदलते समय के साथ बदलता हाल दिखता है


इतनी दूर तक चले की मंज़िल बेमानी हो गयी

सफर में जो सीखा बस वही अनमोल दिखता है 


मुड़कर जो देखूं तो गलतियाँ साफ़ दिखती हैं

उन्हें करनेवाला मैं नहीं कोई और ही दिखता है


बताते हैं खुले में निकलना अब सेहतमंद नहीं 

अब घर के अंदर हर मौसम एक सा दिखता है


जिस्म पर पड़ी रंगीन धूल जब हटेगी तो देखना   

भोपाली कल जैसा था आज वैसा ही दिखता है 

April 06, 2020

फैसला किया है

तुमसे दूर रहने का फैसला किया है 
बड़ा मजबूर होकर फैसला किया है

तुम्हे अपना हक़ समझने लगा था
अब कद्र करने का फैसला किया है

ये मर्ज़ है नज़दीकियों से फैलता है
दूर से साथ देने का फैसला किया है

परेशानियों का हल मैं नहीं जानता
कोशिश करने का फैसला किया है

जिन रास्तों पर दौड़ना छोड़ दिया
फूलों ने खिलने का फैसला किया है

थोड़ी रौशनी या बहुत उम्मीद जो भी
एक दिया जलाने का फैसला किया है

अब तो फुरसत भी है हाथ भोपाली
कहो क्या करने का फैसला किया है