July 02, 2014

सहज प्रेम

महान रॉक बैंड U2 के अँग्रेज़ी गीत, 'Ordinary Love' के अनुवाद का प्रयास कर रहा हूँ ।  आप वह गीत अंग्रेज़ी में यहाँ पढ़ सकते हैं: http://www.u2.com/discography/lyrics/lyric/song/585/


समुद्र की चाह चूमे स्वर्णिम किनारा।
सूर्य की किरणें गरमाए तुम्हारे अंग।
जो खो गया था पहले सौंदर्य सारा, वो फिर पाना चाहे हम को संग।
मैं और नहीं लड़ सकता तुमसे, मैं लड़ ही तो रहा तुम्हारे लिए।
समुद्र ने फेंके कठोर पत्थर पर समय, उन्हें चिकने कर गया हमारे लिए।

हम और क्या गिरेंगे यहाँ से जो, न अनुभव कर सकें सहज प्रेम का।
और नहीं कोई आरोहण संभव, जो हम सामना न कर सकें सहज प्रेम का।

पंछी ऊंचा उड़ते है गर्म आसमान में और करते थोड़ा आराम नर्म हवाओं पर।
वही हवाएँ संभाल लेंगी तुम्हे और मुझे, चलो हम भी बनायें आशियाँ पेड़ों पर।
तुम्हारा दिल मेरी आस्तीन पर है, क्या जादूई कलम से था वहां बना दिया।
वर्षों तक मैं मानता रहा, की यह संसार, जितना मिटाये पर वह न मिटा किया।

क्योंकि हम और क्या गिरेंगे यहाँ से जो, न अनुभव कर सकें सहज प्रेम का।
और नहीं कोई आरोहण संभव, जो हम सामना न कर सकें सहज प्रेम का।

क्या सबल हम इतने, पूर्वाकाँक्षा जो सहज प्रेम की ?

हम और क्या गिरेंगे यहाँ से जो, न अनुभव कर सकें सहज प्रेम का।
और नहीं कोई आरोहण संभव, जो हम सामना न कर सकें सहज प्रेम का।

क्या सबल हम इतने, पूर्वाकाँक्षा जो सहज प्रेम की ?
क्या सबल हम इतने, पूर्वाकाँक्षा जो सहज प्रेम की ?
क्या सबल हम इतने, पूर्वाकाँक्षा जो सहज प्रेम की ?

June 30, 2014

मिलता है


तुम से मिलकर हौसला मिलता है
कोई हमसे भी बेवज़ह मिलता है

आशिक़ के जनाज़े में किसी को टटोलो
हर शख्स ही एक आशिक़ मिलता है

ये बेसब्र भीड़ हर दिन कहाँ जाती है
इन्हे क्या मिले जो इन्हे सब्र मिलता है

रात जब नींद में तुझे ढूंढते हैं ये हाथ
तेरी ज़ुल्फ़ों से महका तकिया मिलता है

हमसे पूछो तो हम अपना पता देते हैं
हमशक्ल हमारा भोपाल में मिलता है 

तुम्हे देखकर बहुत सुकून मिलता है

तुम्हारे नाक नक्श में अतीत मिलता है
नन्ही आखों में मुस्तक़बिल मिलता है

तुम्हारे छोटे छोटे हाथों में
बड़े कारनामों का इशारा मिलता है

यूं तो ख़ून का रंग एक है  सब का
अपना खून बस अपनों से मिलता है

नींद में कभी कभी मुस्कुराते हो तुम
तुम्हे देखकर बहुत सुकून मिलता है

कभी सोचा न था की मेरे अंदर भी
जज़्बातों का एक समंदर मिलता है  

March 30, 2014

आओ नए मेहमान

खिड़कियाँ नयी हवाओं को बुला रहीं
दरवाज़े नए मौसम को दावत दे रहे
दिये नए रंगों कि रौशनी से जगमग
कालीन नयी आहट को बुला रहे

रोशनाई नयी सोच को खोज रही
किताबें नयी कविताओं को ढून्ढ रहीं
सुराही को नए रस कि प्यास है
तस्वीरें नए किरदार को बुला रहीं

आओ नए मेहमान नयी हवाओं कि तरह
नए मौसम कि तरह, नए रंगों कि तरह
तुम्हारे नन्हे क़दमों कि आहट से
पवित्र कर दो यह घर मंदिर कि तरह

आओ नए मेहमान नयी सोच लेकर
नयी कवितायें लेकर , नए रस लेकर
अपने किरदार से जोड़ दो नए अध्याय
मेरे जीवन को नन्हे हाथों से छुकर

आओ नए मेहमान, आओ

November 24, 2013

तुम्हारी शर्तों पर तुम्हे प्यार करें तो कैसे

तुम्हारी शर्तों पर तुम्हे प्यार करें तो कैसे
तुम पर अपनी हस्ती निसार करें तो कैसे

तुम मुस्कुरादो तो दिन खूबसूरत हो जाये
सोच रहे कि आज तुम्हे हंसाएँ तो कैसे

ज़िन्दगी कि हर मिठास खट्टी हो जायेगी
गुस्से में हम तुम्हे भला बुरा कहें तो कैसे 

तुम से किया हर वादा हम निभाएंगे मगर
तुम्हारे मन में छुपे डर को हटाएं तो कैसे

हर आशिक़ी में दिलचस्प मोड़ आतें हैं
हर मोड़ पे आशिक़ हँसता मिले तो कैसे 

October 12, 2013

ज़िंदगी के साथ चलता रहा कोई

ज़िंदगी के साथ चलता रहा कोई
हंसता रहा कोई रोता रहा कोई

एक पुरानी किताब महक उठी
पन्नों मे फूल दबा गया कोई

कोई इतना खामोश है तो क्यों
उस से जाने क्या कह गया कोई

यहाँ दोस्तों से इतनी दूर आ गये
क्या वहाँ हमे पूछता होगा कोई

सवाल ऐसे की जवाब बेमानी लगें
ये किस मकाम पे छोड़ गया कोई

क्या है इस ज़िंदगी का सबब
मिलाओ उस से जो जानता हो कोई
 

October 24, 2012

काफ़िर यूँ भी सोचता है कभी कभी

काफ़िर यूँ भी सोचता है कभी कभी
क्या हर्ज़ जो मस्जिद चलें कभी कभी 

यूँ तो बेसुध होने आते हैं तेरे दर साकी 
कर रहम शराब पानी हो जाये कभी कभी

सपने पिघल जाते हैं हलकी सी धुप में
सूरज देखे जो ख्वाब तो कैसे कभी कभी

शाखें मेज़ बन गयीं और पत्तियां किताबें
मौसम के हारों को पढ़ के देखो कभी कभी

सड़कों को मेरा वज़न क्या महसूस होगा
हम इन्ही की बाहों में गिरे हैं कभी कभी

जो रात के अंधेरों में छुप कर लिखे
उन शेरों को महफ़िल में पढो कभी कभी