January 19, 2020

उनसे कहने को कुछ न रहा

उनसे कहने को कुछ न रहा
ये रिश्ता जो था वो न रहा

वो मंदिर धोता, मस्जिद भी
वो किसी धर्म का अब न रहा

शामें सोचते गुज़र जाती हैं
दौर पुराना क्यों और न रहा

गुमनाम आशिक़ कई हुए
हर एक नाम मशहूर न रहा

कुछ तेरा झूठ कुछ मेरा झूठ
सच बेचारा किसी का न रहा

जितना नज़र देख पाती है
पार उसके नज़रिया न रहा

थोड़ा-थोड़ा गलत हुआ बड़ा
तेरा चुप रहना ठीक न रहा

उसे मसीहा जब मान लिया
मुझ पर अब कोई भार न रहा

सर झुकाकर गुज़रे तमाम उम्र
भोपाली तेरा कंही चर्चा न रहा

January 02, 2020

कल की सुबह

न हो प्रेम पर सियासत
न प्रेम करना मुसीबत
न हो सवाल रंग, लिंग और मत
कल की सुबह भोपाली
बस प्रेम हो इंसां की विरासत

ये सरहदें कल न थी न होंगी
ये मसीहा कल न थे न होंगे
क्या सही-गलत जो हम न होंगे
ये चेहरे आज की छपाई हैं 
कल सूरतों पर रंग नये होंगे

जहाँ डर वहां समाज कैसा
जहाँ झूठ वो अखबार कैसा
मरे मज़दूर वो बाज़ार कैसा
आज कागज़ी पहचान जो हो
कल इंसान हो इंसान जैसा

न छोटे को डर हो बड़े का 
न बड़े को डर हो छोटे का 
बंद हो व्यापार भय का
हम सुनें भी और सुनने भी दें
कल मोल हो कम कहने का

शुरुआत बड़ी न हो, पर हो
उम्मीद पक्की न हो, पर हो
हिम्मत पूरी नहीं, पर हो
छोटे क़दमों से तय बड़े फासले
कल पहला कदम रास्ते पर हो

December 30, 2019

जगाया विश्वास [Imagine Dragons - Believer]

Attempting a translation of the band Imagine Dragons' song, "Believer". You can find that actual lyrics in English by searching for it in Google.

पहली बात पहले  
कहने वाला हूँ हर शब्द जो सर में है मेरे 
जोश में हूँ मैं और थक गया हूँ जिस तरह के हाल हैं यहाँ, ओह ऊह
जिस तरह के हाल हैं यहाँ, ओह ऊह

दूसरी बात दूजी
तुम मत मुझे बताओ तुम सोचते हो क्या मेरे बस की
मैं हूँ संभाले बादबान, मैं हूँ शाह-ऐ-समंदर
मैं हूँ शाह-ऐ-समंदर

टूटा हुआ था मैं छोटी उम्र से 
ले गया अपनी उदासी लोगों तक 
लिखी मेरी कविताएं उनके लिए
जिन्होंने देखा मुझे, समझा मुझे, झगझोड़ा मुझे, महसूस किया मुझे 
गाया हृदय वेदना को, दर्द को
लेकर नसों में दौड़ते संदेश को
कहे मेरे सबक मेरी समझ से
देखा सुंदरता को
दर्द से !

तुम ने जगाया मुझ में, तुम ने जगाया मुझ में विश्वास, विश्वास
दर्द से, दर्द से
तुम ने तोड़ा मुझे, तुम ने जोड़ा मुझे, जगाया विश्वास, जगाया विश्वास
दर्द से
ओह  चलने दो गोलियाँ, ओह  बरसने दो उन्हें
मेरा जीवन, मेरा प्रेम, मेरा जुनून, सब आया है
दर्द से
तुम ने जगाया मुझ में, तुम ने जगाया मुझ में विश्वास, विश्वास 

तीसरी बात तीजी
प्रार्थना ऊपर वाले से
सारा ये द्वेष जो सुन रहे हो आप, कर गया भरोसे को कमज़ोर
आप पर भरोसे को ऊपर वाले, ओह ऊह 

मैं घुट रहा था भीड़ में
थामे अपनी बारिशों को मेघ में
जो गिरीं जैसे राख बन ज़मीन पर
चाहा मेरी भावनाओं को ले चलें डुबो कर
पर हुआ नहीं, वो सदा रहीं, उतरतीं, बहतीं
संकुचित, सीमित
फिर तोड़कर सब को, वो बरस पड़ीं
बरस पड़ीं
दर्द से

तुम ने जगाया मुझ में, तुम ने जगाया मुझ में विश्वास, विश्वास
दर्द से, दर्द से
तुम ने तोड़ा मुझे, तुम ने जोड़ा मुझे, जगाया विश्वास, जगाया विश्वास
दर्द से
ओह  चलने दो गोलियाँ, ओह  बरसने दो उन्हें
मेरा जीवन, मेरा प्रेम, मेरा जुनून, सब आया है
दर्द से
तुम ने जगाया मुझ में, तुम ने जगाया मुझ में विश्वास, विश्वास 

आखिरी बात आखिर
अग्नि और ज्वालाओं के आशीर्वाद से
तुम भविष्य की सूरत हो, मेरी रगों का खून, ओह ऊह 
मेरी रगों का खून, ओह ऊह 
पर हुआ नहीं, वो सदा रहीं, उतरतीं, बहतीं
संकुचित, सीमित
फिर तोड़कर सब को, वो बरस पड़ीं
बरस पड़ीं
दर्द से

तुम ने जगाया मुझ में, तुम ने जगाया मुझ में विश्वास, विश्वास
दर्द से, दर्द से
तुम ने तोड़ा मुझे, तुम ने जोड़ा मुझे, जगाया विश्वास, जगाया विश्वास
दर्द से
ओह  चलने दो गोलियाँ, ओह  बरसने दो उन्हें
मेरा जीवन, मेरा प्रेम, मेरा जुनून, सब आया है
दर्द से
तुम ने जगाया मुझ में, तुम ने जगाया मुझ में विश्वास, विश्वास 

January 18, 2018

मुझ से पहली सी मोहब्बत मेरे मेहबूब न मांग [Translation]

Attempting a translation of Faiz Ahmed Faiz's iconic "मुझ से पहली सी मोहब्बत मेरे मेहबूब न मांग". You can read his original (transliterated in English) here.

Don't ask me to love as I used to, my love
I thought it was you who illuminated life
No sorrows of the world were greater than your sorrows
Your face gave the world its spring
Nothing worthy in this world, but for your eyes
If you were mine, fate would wither away
I wished it be so but it isn't that way
There are miseries, in these times, other than love
There are other pleasures to have beyond making love


Innumerable dreadful spells of centuries,
wrapped in satin and silk
Bodies put up for sale, everywhere, streets and markets,
battered in dust, bathed in blood


Bodies baked in diseased furnaces,
puss oozing from melting wounds
My gaze returns to those sights, what do I do,
but am still allured by your beauty, what do I do

There are miseries, in these times, other than love
There are other pleasures to have beyond making love
Don't ask me to love as I used to, my love
 

January 31, 2017

रह जाएगी

बिना रौशनी शाम अँधेरी रह जाएगी
बेसबब जिंदंगी गुज़रती रह जाएगी

पंखुड़ियों के बीच खुशबू को यूँ न छुपा
ऐ गुल तेरी हस्ती बेमानी रह जाएगी

अपना रुमाल ही गिरा दीजिये वरना
दिल से निकली बात अधूरी रह जाएगी

हसीं जलवों का कोई असर नहीं मुझ पर
अब ये मेरी बात पुरानी रह जाएगी

है रकीब वो मेरा पर आशिक़ भी तो है
उसे हराकर जीत बेमानी रह जाएगी

मेरी आग़ोश में रहोगे यूँही जब तक
हर लम्हे की उम्र बढ़ती रह जाएगी

उनके होठों का रंग ने पूछो मुझे से
गुलाबों की क्यारियां बेरंग रह जाएगी

January 26, 2017

रंग नया है

मौसम में निकले पत्तों का रंग नया है
डाल पर बैठी चिड़ियों का रंग नया है

बदन थकान से टूट रहा है मगर
आँखों पर उतरे जोश का रंग नया है

अफसरी हुक्म से शराब बंद है
प्यालों पर भरे पानी का रंग नया है

हम साथ रहते हैं पर बात नहीं करते
लबों पर हमारी ख़ामोशी का रंग नया है

ये घर अपनों की नज़दीकियां खोज रहा है
यहाँ पर फ़ैली दूरियों का रंग नया है

बच्ची की पायल से फर्श सुरमयी है
कालीन पर पड़ती ख़ुशी का रंग नया है

अच्छे दिन कुछ चल रहे हैं यूँ हमारे
कहने पर हर बात का रंग नया है

यूँ आधी रात को शेर कहने की तलब
ग़ज़ल पर चढ़ती नींद का रंग नया है

January 11, 2017

मैं घर से निकला

मैं घर से निकला
जाने कहाँ को निकला

मौसमी मर्ज़ समझा
दिल का रोग निकला

फूलों से हार निकले
गर्द से पेड़ निकला

कई हमदर्द निकले
बस एक दोस्त निकला

बारिश ने ज़ोर पकड़ा
चुनरी से रंग निकला

जिसे शिद्दत से चाहा
वही बे-वफ़ा निकला

जो था मंज़िल का निशां
वो नया रस्ता निकला

जिसे रकीब समझा
दिल का साफ़ निकला

ज़रा सा दम भर लूँ
फिर मैं भी निकला

भोपाली जाए कहाँ
ये अलग शहर निकला