May 19, 2009

ख़्वाबों पे हक किसका है?

बोलो, खुशबु पे हक किसका है?
फूलों का, हवाओं या माली का?
जुल्फों मे सजा मोगरा क्या जाने

बोलो, ख़्वाबों पे हक किसका है?
रातों का, उम्मीदों या अपनों का?
बाहों मे लिपटा बदन क्या जाने

वीरान सड़कों पे हक किसका है?
हिन्दुओं, मुसलमानों, इसाईयों का?
दंगों मे उजडे जो घर, क्या जाने

अन्तिम साँसों पे हक किसका है?
संतोष का, थकान या मुक्ति का?
तिजोरी को तकते बेटे क्या जाने

1 comment:

  1. हुज़ूर आपका भी .......एहतिराम करता चलूं .....
    इधर से गुज़रा था- सोचा- सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽ

    कृपया एक अत्यंत-आवश्यक समसामयिक व्यंग्य को पूरा करने में मेरी मदद करें। मेरा पता है:-
    www.samwaadghar.blogspot.com
    शुभकामनाओं सहित
    संजय ग्रोवर

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